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निदेशक की कलम से

प्रिय मित्र,

 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय विकलांग जन संस्थान वर्ष 1976 में एक स्वायत निकाय के रुप में अस्तित्व में आया । इस संस्था को स्व. श्री निरंकार स्वरुप ने 50 के दशक में विकलांग बच्चों और व्यक्तियों को व्यापक पुनर्वास सेवायें प्रदान करने के लिए एक गैर-सरकारी संस्था के रुप में आरम्भ किया था । इस संस्था ने देश के उत्तरी भाग में भौतिक चिकित्सा और व्यावसायिक चिकित्सा के क्षेत्र में मानव शक्ति विकास का प्रमुख कार्य आरम्भ किया । इस पूर्व स्वयंसेवी संस्था को वर्ष 1975 में समाज कल्याण मंत्रालय,  भारत सरकार ने अपने हाथ में लिया और वर्ष 1976 में इसे एक पंजीकृत सोसायटी के रुप में पंजीकृत किया गया । यह संस्थान दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बध्द 4म् वर्ष की अवधि के बैचलर आफ फिजिकल थरेपी और बैचलर आफ आकूपेशनल थरेपी  के डिग्री पाठ्कम चला रहा है । संस्थान से डिग्री प्राप्त तथा पूर्व डिप्लोमा धारी प्रत्याशी भारत और विदेशों के विभिन्न अस्पतालों, पुनर्वास केन्द्रों और स्वास्थ्य रक्षा संस्थाओं में कार्य कर रहे हैं । मुझे यह सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि संस्थान ने दो वर्ष पूर्व 4म् वर्ष की अवधि का प्रौस्थैटिक व आर्थोटिक डिग्री पाठयक्रम आरम्भ किया है । बैचलर आफ फिजिकल थरेपी और बैचलर आफ आकूपेशनल थरेपी पाठयम की तरह बैचलर आफ प्रौस्थेटिक व आर्थोटिक पाठयक्र्रम भी दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बध्द है ।

मानव शक्ति विकास के अलावा यह संस्थान चलन विकलांगता से ग्रस्त व्यक्तियों को व्यापक पुनर्वास सेवायें प्रदान कर रहा है ।  इन सेवाआें में चिकित्सीय उपचार,  सहायक अंग व   उपकरण, समाजिक, व्यावसायिक और मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा स्थापन सेवायें शामिल हैं । हम सम्बध्द जिला प्रशासन के सहयोग से दूरदराज के क्षेत्रों में भी सेवायें प्रदान करते हैं । दक्षिण क्षेत्रीय केन्द्र सिकन्दराबाद  और विभिन्न राज्यों में जिला विकलांग पुनर्वास केन्द्रों ने संस्थागत सेवाओं के विस्तार में इस संस्थान को बल प्रदान किया है ।

यह संकाय, व्यावसायिकों और प्रबंधकवर्ग का समूहिक प्रयास ही है कि दशकों से यह संस्थान अपना उत्कृष्ठ स्वरुप बनाये हुए है । यह समर्पित लोगों, सामाजिक कार्र्यकत्ताओं, स्वयं सेवियों और जिला और सम्बध्द जिला प्रशासन का सहयोग ही है कि हम जरुरतबन्द विकलांग व्यक्तियों को अपनी सेवायें उपलब्ध करा सके हैं ।

इस बेबसाइट को समाज के विभिन्न वर्गों को ध्यान में रखते हुए आरम्भ व अद्यतन किया गया है । मेरा विश्वास है कि इससे विभिन्न वर्गो की तात्कालिक अपेक्षताओं की पूर्ति होगी तथा सामाजिक कार्र्यकत्ताओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इसे अधिक उपयोगी व सूचनाप्रद बनाने के लिए यह संस्थान वर्तमान सूचना संवितरण में सुधार के लिए समर्पित व्यक्तियों द्वारा दिए गये सुझाओं का स्वागत करेगा । हम आभारी होगें, यदि समाज के प्रबुध्द व सम्बध्द व्यक्ति जो कि विकलांग व्यक्तियों के प्रति समर्पित हैं, संस्थान के कार्यकलापों में सुधार सम्बंधी सुझाव देते रहे । हम सदैव मानव सेवा के लिए तत्पर हैं ।            

सभी आगन्तुकों के लिए नर्ववर्ष समृध्दिपूर्ण व मंगलमय हो ।

 

(डॉ. धर्मेन्द्र कुमार)

 

 

 
       
 
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